नवरात्र का छठे  दिन माँ कात्यायनी के प्रभाव से मिलती है विजय!

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लेखिका : रजनीशा शर्मा

नवरात्र की षष्ठी तिथि को माँ कात्यायनी का पूजन किया जाता है | माँ कात्यायनी का स्वरूप अत्यंत मनमोहक और रौद्र है | माँ कात्यायनी सिंह पर सवार हो कर अपने शत्रुओ का संहार करती है | माँ अपने हाथो में कमल एवं चन्द्रहास धारण करती है और अन्य दो हाथो से भक्तो को विजय और ज्ञान का आशीर्वाद देती है | माँ कात्यायनी का नाम ऋषि कात्यायन की पुत्री होने के कारण कात्यायनी पड़ा | ऋषि कत्यायन ने तप कर माँ से वर स्वरूप उनका पिता बनने की इच्छा व्यक्त की तब माँ ने कात्यायनी बन अपने भक्त की इच्छा पूर्ण की | माँ कात्यायनी का जन्म षष्ठी को हुआ इस कारण इस दिन माँ कात्यायनी की पूजा का प्रावधान है |  माँ कात्यायनी ने ही महिषासुर का दशमी के दिन वध किया था | अश्विन कृष्ण चतुर्दशी को जन्म लेकर शुक्ल सप्तमी ,अष्टमी तथा नवमी तक तीन ऋषि कात्यायन की पूजा ग्रहण कर दशमी के दिन माँ कात्यायनी ने महिषासुर का वध किया था |  माँ की आराधना से गृहस्थों  एवं गृहस्थ जीवन प्रारम्भ करने के इच्छुक व्यक्तियों को तत्काल प्रभाव की प्राप्ति होती है | माँ पापियों और असुरो का नाश करने वाली देवी है |

                                                             माँ कात्यायनी की आराधना से साधक का मन आज्ञा चक्र में अवस्थित होता है | योग साधना में इस चक्र का महत्वपूर्ण स्थान है | यह चक्र अन्य सभी चक्रो की अपेक्षा अधिक शक्तिशाली मन गया है | माँ कात्यायनी की आराधना से अर्थ , धर्म ,काम , मोक्ष चारो फलों की प्राप्ति  सहज ही हो जाती है | माँ की कृपा से जन्म जन्मांतरों के पापो का अंत हो जाता है |

 माँ का ध्यान मंत्र -

                           चंद्र हासोज्ज वलकरा शार्दू लवर वाहना |

                            कात्यायनी शुभम दद्या देवी दानव घातिनी||