नवरात्रि के पांचवे दिन माँ स्कन्द माता देती है योग्य संतान प्राप्ति का वरदा

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लेखिका : रजनीशा शर्मा

नवरात्रि के पांचवे दिन माँ स्कन्द माता की पूजा की जाती है | माँ स्वरूप अत्यंत अद्भुत और करुणामयी है | माँ स्कंदमाता वात्सल्य की प्रति मूर्ति है | माँ स्कंदमाता अपनी गोद में भगवान स्कन्द को लिए है और एक हाथ में कमल धारण किये हुए है | माँ अपनी चारो भुजाओ से अपनी सन्तानो का कल्याण करती है | माँ स्कन्द माता सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी है | माँ का वाहन सिंह है | माँ स्कंदमाता की कृपा से मूढ़ भी ज्ञानी हो जाता है | माँ स्कंदमाता में विद्वानों को रचने की शक्ति है | शास्त्र कहते है माँ की कृपा से अनायास ही मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है | संतान की आस खो चुके दम्पत्ति  भी संतान प्राप्त कर लेते है | संतान चाहने वाले दम्पत्ति को माता के चरणों में लाला रंग का फल एवं फूल  , चूड़ी , बिंदी  चुनर आदि सुहाग का सामान अर्पित करना चाहिए |

                                                       माँ स्कंदमाता की पूजा करने से साधक का मन विशुद्ध चक्र में स्थित होता है और साधक असीम ज्ञान एवं बुद्धि प्राप्त करता है | माता का ध्यान मंत्र है -

               सिंहासनगता नित्यं पद्याश्रितकरदवया,

               शुभदास्तु सदा देवी स्कंदमाता यशस्विनी |

 

 माँ स्कंदमाता को केले का भोग प्रिय है | माँ को केले का भोग लगाए और दान भी करे | आपके घर में सुख शान्ति बनी रहेगी | शास्त्रों में माँ स्कंदमाता को गले और वाणी की अधिष्ठात्री देवी माना गया है | माँ की कृपा से सुंदर और सौम्य वाणी की प्राप्ति होती है | माँ को भोग लगा कर प्रसाद ग्रहण करने से और देवी से प्रार्थना करने से गले संबंधी रोगो का नाश होता है |