कहीं आपकी पेट की समस्या आपकी कुंडली में मौजूद अशुभ शनि के कारण तो नहीं ?

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लेखक: सोनू शर्मा

हर ग्रह, राशि व नक्षत्र का अपना स्वभाव व विशेषताएँ होती है तथा शरीर के किसी न किसी भाग पर इसका प्रभाव होता है, जिस भाव या राशि में वह ग्रह स्थित होता है उसके शुभ व अशुभ प्रभाव के अनुसार ही व्यक्ति उस रोग से ग्रसित होता है ।

 

- यदि शनि कुंडली में पीड़ित हो तो उस व्यक्ति के शरीर में वायु असंतुलित हो जाती है जिसके कारण पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है जिससे व्यक्ति को भोजन ठीक से नहीं पचता । पेट के रोग भी शनि की अशुभता के कारण होते है ।

 

- यदि किसी की कुंडली में दूसरे भाव में शनि हो तो उस व्यक्ति को संग्रहणी रोग होने की सम्भावना बनी रहती है क्योकि शरीर में जो वायु पेट में होती है उसका संतुलन बिगड़ जाता है जिससे भोजन ठीक से नहीं पच पाता और वह बिना पचे ही बाहर निकल जाता है जिससे शरीर कमजोर हो जाता है ।

 

- इसी प्रकार यदि किसी कुंडली में शनि व चंद्र की युति हो या छटे भाव के स्वामी या चंद्र का लग्न भाव पर प्रभाव हो तो व्यक्ति प्लीहा रोग से पीड़ित हो सकता है ।

 

- इसी प्रकार यदि पंचम भाव में शनि व चंद्र की युति हो तो भी व्यक्ति प्लीहा नामक रोग से ग्रसित हो सकता है ।

 

- यदि कुंडली में सप्तम भाव में शनि व मंगल ग्रह की युति हो तथा लग्न भाव में राहु, बुध गृह पर दृष्टि डाले तो व्यक्ति को अतिसार रोग हो सकता है । यदि कुंडली में शुक्र शनि के द्वारा पीड़ित हो तो व्यक्ति धातु रोग से परेशान होता है ।

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