क्या आप जानते हैं आप कब तक जिएंगे ? आप जानते है कुंडली में अल्पायु योग!

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लेखक: सोनू शर्मा

प्रत्येक व्यक्ति जब पैदा होता है तो एक निश्चित आयु लेकर पैदा होता है, जिस प्रकार कुंडली के माध्यम से व्यक्ति के सुख - दुःख, धन, मान - सम्मान, सामाजिक स्थिति, शिक्षा के बारे में जाना जा सकता है उसी प्रकार वह व्यक्ति कितनी आयु लेकर आया है इस बारे में भी जान सकते है ।

कुंडली में लग्न भाव, तृतीय भाव और अष्टम भाव आयु से सम्बन्ध रखते है, यदि किसी कुंडली में लग्न भाव का स्वामी छटे, आठवे या बारहवे भाव में स्थित हो तो यह आयु की दृष्टि से ठीक स्थिति नहीं होती ।

यदि किसी जातक का जन्म कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि में हुआ हो अथवा सूर्य चंद्र के अत्यधिक करीब हो तो यह जातक की अल्पायु का सूचक है । ऐसी व्यक्ति की मृत्यु किसी सामाजिक जगह पर, नशा अधिक करने के कारण, नाव के डूबने के कारण या सड़क दुर्घटना में मृत्यु के योग बनते है ।

यदि किसी जातक की कुंडली में अष्टम भाव का स्वामी छटे या बारहवे भाव में स्थित हो तथा लग्न भाव में लग्नेश के साथ यदि सूर्य भी स्थित हो तो और लग्न पर पापी ग्रहों का दृष्टि सम्बन्ध बन रहा हो तो वह व्यक्ति अल्पायु लेकर आता है ।

यदि किसी जातक की कुंडली में तीसरे भाव, छटे भाव या बारहवे भाव में पापी ग्रह राहु, केतु, शनि, मंगल बैठे हो तो यह व्यक्ति की कम आयु को दर्शाता है ।

लग्न भाव आयु के लिए बहुत महवत्पूर्ण भाव है, यदि लग्न भाव पर या लग्न के स्वामी पर किसी भी शुभ ग्रह की दृष्टि न हो तथा पापी ग्रहों की दृष्टि हो, केंद्र में कोई भी शुभ ग्रह स्थित न हो और पापी ग्रह स्थित हो तो यह व्यक्ति की कम आयु का सूचक है । यदि लग्नेश चन्द्रमा होकर अस्त हो या कमजोर हो तो भी व्यक्ति की आयु कम ही होती है ।