आखिर क्यों पूजा में तांबे के कलश का ही इस्तेमाल होता है ?

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लेखक: सोनू शर्मा

किसी भी शुभ कार्य को करने में या पूजा करने में कलश का प्रयोग किया जाता है, पूजा में ताम्बे का कलश ही प्रयोग में लाया जाता है, इसके अनेक कारण है ।

कलश का इस्तेमाल सुख व समृद्धि को बढ़ाने के लिए किया जाता है । हिन्दू मान्यताओं के अनुसार ताम्बा सबसे पवित्र धातु मानी जाती है, यह धातु सबसे शुद्ध होती है क्योकि इसे बनाने में किसी अन्य धातु का मिश्रण नहीं किया जाता । सूर्य नमस्कार के लिए जो कलश इस्तेमाल होता है वह भी ताम्बे का ही बना होता है ।

ताम्बे के लोटे में जल डालकर उसमे तुलसी की पत्तियाँ डालकर रखा जाता है तथा उसी जल से पूजा आचमन किया जाता है क्योकि बिना तुलसी के पत्तो के पूजा पूरी नहीं मानी जाती ।

ताम्बे के बर्तन में पानी रखने से पानी शुद्ध हो जाता है तथा कीटाणु समाप्त हो जाते है इसलिए पूजा में ताम्बे का इस्तेमाल किया जाता है ।

कलश ऊर्जा का स्रोत होता है, पूजा में या शुभ कार्य में कलश रखने से उस व्यक्ति की भावनात्मक, शारीरिक तथा आध्यात्मिक ताकत बढ़ती है तथा उस व्यक्ति का बौद्धिक विकास होता है । जब भी ताम्बे के कलश में पूजा करने के लिए मंत्रो द्वारा पानी डाला जाता है तब कलश में दिव्य ऊर्जा उत्पन्न हो जाती है तथा उस जल में औषधीय गुण उत्पन्न हो जाते है ।

ताम्बे के कलश में रोगों का शमन करने की शक्ति विद्यमान होती है, यह सेहत के लिए तथा शक्ति व स्फूर्ति के लिए उत्तम है । ताम्बे का कलश रखने से उस स्थान पर सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है ।

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