क्या होता है विषकन्या योग और इसका क्या प्रभाव होता है?

453.jpg

लेखक: सोनू शर्मा

ज्योतिष के अनुसार कुंडली में जहाँ बहुत सारे राजयोग होते है, उसी प्रकार कुछ अशुभ योग भी पाए जाते है, उनमे से एक योग है विषकन्या योग । यह योग बहुत ही अशुभ माना जाता है, इस योग में जन्म लेने वाली कन्या के  माता- पिता तथा भाई को बहुत कष्टों का सामना करना पड़ता है ।

इसी प्रकार जब कन्या का विवाह हो जाता है तो उसके ससुराल पक्ष को बहुत मुसीबते उठानी पड़ती है, यदि यह योग अधिक अशुभ हो तो पति की आयु के लिए भी खतरा हो सकता है । यह योग तिथि, वार एवं ग्रह नक्षत्रों से मिलकर बनता है । कन्या की कुंडली में विषकन्या योग इस प्रकार बनता है -  

- यदि रविवार के दिन द्वितीया तिथि हो तथा अश्लेषा या शतभिषा नक्षत्र हो ।

- इसी प्रकार रविवार के दिन द्वितीया तिथि हो तथा कृतिका, विशाखा या शतभिषा में से कोई एक नक्षत्र हो भी यह योग बनता है ।

- मंगलवार को सप्तमी तिथि हो तथा आश्लेषा, बिशाखा या शतभिषा में से कोई एक नक्षत्र हो, इसी प्रकार लग्न भाव में शनि, पंचम भाव में सूर्य तथा नवम भाव में मंगल स्थित हो तो कुंडली में यह योग बनता है ।

- इसी प्रकार सप्तम भाव में एक से अधिक पापी ग्रह हो तथा पापी ग्रहों का दृष्टि सम्बन्ध बन रहा हो तो भी यह प्रभाव विवाह के लिए ठीक नहीं होता ।

- यदि जन्म लग्न या चंद्र लग्न में सप्तम भाव में सप्तमेश स्थित हो और वह अशुभ ग्रह हो तो विषकन्या योग का प्रभाव समाप्त हो जाता है ।

Contact us +91 8449920558
contact@starzspeak.com

Get updated with us