क्यों बजाया जाता है मंदिरो में घंटा और पूजा में शंख ?

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लेखक: सोनू शर्मा

क्यों बजाया जाता है मंदिरो में घंटा और पूजा में शंख ?

प्राचीन काल में हिन्दू मंदिरो में घंटा व शंख बजाया जाता है, इसके धार्मिक महत्व के साथ वैज्ञानिक महत्व भी है । आइये जानते है उनमे से कुछ प्रमुख तथ्यों के बारे में –

घंटा - जब हम किसी मंदिर में प्रवेश करते है तो हम घंटा बजा कर ही प्रवेश करते है, घंटा बजा कर जब हम उसके नीचे खड़े होते है तो हमारे मन में उठने वाले असंख्य विचार रुक जाते है, नकारात्मकता दूर हो जाती है तथा हमारे भाव शुद्ध हो जाते है । मन अध्यात्म की ओर डाइवर्ट हो जाता है तथा मन पवित्र हो जाता है ।

घंटा बजाने से जो वाइब्रेशन होता है उसका सीधा असर हमारे शरीर पर पड़ता है ओर मन एकाग्र हो जाता है। घंटे की ध्वनि कई किलोमीटर तक फैलती है जिससे आस पास का वातावरण शुद्ध होने के साथ साथ जीवाणु नष्ट हो जाते है, आस पास जितनी की नेगेटिव शक्ति है वह हट जाती है । घंटा एक विशेष ताल व लय के साथ बजाया जाता है जिसका हमारे शरीर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, इससे शरीर में ऊर्जा व शांति का अनुभव होता है, मन प्रसन्न होता है तथा तनाव दूर होता है ।

शंख - शंख पूजा व अनुष्ठान के समय बजाया जाता है, शंख बजाने से बहुत से रोग भी ठीक हो जाते है, इससे वाणी सम्बन्धी समस्या जैसे की बोल ना पाना, हकलाना आदि समस्या ठीक हो जाती है । जब हम शंख बजाते है तो शंख से निकलने वाली ध्वनि वातावरण को शुभ करती है, इस ध्वनि को सुनकर लोगों के मन में अच्छे विचार उत्पन्न होते हैं । शंख बजाने से श्वास समबन्धी रोग भी दूर हो जाते है और फेफड़े का भी व्यायाम होता है । ऐसा माना जाता है की शंख में कैल्श‍ियम और फास्फोरस तत्व होता है और इसमें रखा पीने से व्यक्ति की हड्डियां और दाँत मजबूत होते हैं ।