नवरात्रि में क्यों होता है हवन, जानें क्या है हवन विधी

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By: Starzspeak 

10 अक्टूबर, बुधवार से शारदीय नवरात्र प्रारंभ हो रहे हैं. मां इस बार नौका पर सवार होकर आ रही हैं. इसका अर्थ है कि इस बार देवी पृथ्वी के समस्त प्राणियों की इच्छाओं को पूर्ण करेंगी. मां का जो भी भक्त श्रद्धापूर्वक पूजन और व्रत अर्थात निर्मल मन से शुभ फल की इच्छा करेंगे, मां दुर्गा उनकी मनोकामना पूर्ण करेंगी. पूरे देश में शारदीय नवरात्र बड़ी धूमधाम से मनाए जाते हैं. बता दें, नवरात्र में मां दुर्गा की पूजा हवन के बिना अधुरी मानी जाती है. आज के वक्त में मार्केट में बनी बनाई हवन साम्रगी तो मिल जाती है लेकिन इसे करने की विधि की जानकारी के आभाव में अक्सर लोग मंत्रों के बिना ही यह हवन करते हैं.

शास्त्रों की विधि
यदि शास्त्रों की नजर से देखा जाए तो नवरात्र के हवन मंत्रोच्चारण के बिना पूर्ण नहीं होते. आपको बता दें, इसे कई जगह नवमी हवन या चंडी हवन के नाम से भी जाना जाता है. यह हवन नवमी के दिन अथवा दुर्गा पूजा के दिन के समय ही करनी चाहिए.

नवरात्रि हवन विधि
10 अक्टूबर से शुरू हो रहे नवरात्रि से पहले आज हम आपको हवन की शास्त्रीय और दैनिक विधि बताते हैं. दरअसल, शास्त्रीय विधि वह विधि होती है जो शास्त्रों में वर्णित हो और दैनिक विधि का उपयोग आप स्वयं भी कर सकते हैं. शास्त्रों के अनुसार नवरात्रि के अवसर पर मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए मां दुर्गा के मंदिर अथवा घर के पूजन स्थल पर हवन कुंड की स्थापना कम से कम दस उत्तम ब्राह्मणों द्वारा की जानी चाहिए. हवन के दौरान मार्कण्डेय पुराणोक्त श्री दुर्गा सप्तशती का दस बार पाठ करवाना चाहिए.

इसके अलावा प्रत्येक ब्राह्मण से एक-एक हजार नवार्ण मंत्र भी करवाने चाहिए. यहां यह ध्यान रखें कि देवी की पूजा में किसी वस्तु की कमी नहीं हो. कई स्थान पर दुर्गा सप्तमी के प्रत्येक मंत्र के पश्चात स्वाहा का उच्चारण करके आहुति दी जाती है.

ये है दैनिक हवन विधि
अब आपको बताते हैं दैनिक हवन विधि के बारे में जिसका उपयोग आप नवरात्रों के दौरान स्वयं भी कर सकते हैं. सबसे पहले मां दुर्गा की पूजा के बाद एक पात्र में अग्नि स्थापना करें. उसमें आम की लकड़ी व कपूर रखकर जला दें. आवश्यकता पड़े तो शुद्ध देशी घी का प्रयोग करें. उसके बाद निम्न मंत्रों से हवन शुरू करें: ऊं आग्नेय नम: स्वाहा, ऊं गणेशाय नम: स्वाहा, ऊं गौरियाय नम: स्वाहा, ऊं वरुणाय नम: स्वाहा, ऊं सूर्यादि नवग्रहाय नम: स्वाहा, ऊं दुर्गाय नम: स्वाहा, ऊं महाकालिकाय नम: स्वाहा, ऊं हनुमते नम: स्वाहा, ऊं भैरवाय नम: स्वाहा, ऊं कुल देवताय नम: स्वाहा, ऊं स्थान देवताय नम: स्वाहा ऊं ब्रह्माय नम: स्वाहा, ऊं विष्णुवे नम: स्वाहा, ऊं शिवाय नम: स्वाहा, ऊं जयंती मंगलाकाली भद्रकाली कपालिनी दुर्गा क्षमा शिवाधात्री स्वाहा, स्वधा नमस्तुति स्वाहा, ओम ब्रह्मामुरारी त्रिपुरांतकारी भानु: क्षादी: भूमि सुतो बुधश्च: गुरुश्च शक्रे शनि राहु केतो सर्वे ग्रहा शांति कर: स्वाहा, ओम गुर्रु ब्रह्मा, गुर्रु विष्णु, गुर्रु देवा महेश्वर: गुरु साक्षात परब्रह्मा तस्मै श्री गुरुवे नम: स्वाहा


ओम त्रयम्बकम यज्ञा महे सुगान्धी पुष्टि वरधनम् उरवारूक मिव वन्धनान मृत्र्योर मुक्षीय मामृतात मृत्युन्जाय नम: स्वाहा, ओम शरणागत दीनार्त परित्राण परायणे, सर्व स्थार्ति हरे देवि नारायणी नमस्तुते. उपरोक्त मंत्रो का जप करने के बाद नारियल में कलावा बांधकर उसे अग्नि में समर्पित कर दें, इस विधि को वोलि कहते हैं. फिर पूर्ण आहूति के रूप में नारियल, घी, लाल धागा, पान, सुपारी, लौंग, जायफल आदि स्वाहा करें.

पूर्ण आहुति के लिए मंत्र निम्न है: ओम पूर्णमद: पूर्णमिदम् पुर्णात पूण्य मुदच्यते पुणस्य पूर्णमादाय पूर्णमेल विसिस्यते स्वाहा. पूर्ण आहुति के बाद मां दुर्गा को दक्षिणा अर्पित करनी चाहिए. इसके बाद आरती और क्षमायाचना करनी चाहिए. उपरोक्त विधि के माध्यम से आप मां दुर्गा के पावन पर्व नवरात्र में हवन कर सकते हैं. उपरोक्त दैनिक हवन विधि के माध्यम से आप घर पर ही अपने परिजनों के साथ हवन कर सकते हैं. हवन हवा और घर की शुद्धिकरण करता है इसलिए कोशिश करनी चाहिए कि माह अथवा वर्ष में एक-दो बार अवश्य हवन करें.


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