बकरीद मनाने के पीछे छुपा है यह रहस्य..जानिए यहां।

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By: Deepika

बकरीद है जिसे ईद-उल-अजहा भी कहा जाता है। जिसे 22 अगस्त यानि कि आज पूरे विश्व भर में मनाया जा रहा है। बकरीद यह मुस्लिम धर्म का सबसे मुख्य त्यौहार माना जाता है। यदि मुस्लिम समुदाय के इस त्यौहार की महत्ता की बात करें तो आप जानेंगे कि यह दिन मुस्लिम धर्म से सम्बन्धित लोगों को लिए बेहद ही शुभदायी और फलदायी दिन माना जाता है।

यह त्यौहार रमजान के पवित्र महिने के ठीक दो महीने बाद आता है। ईद-उल-फितर यानि कि मीठी ईद के बाद बकरीद ही सबसे बड़ा त्यौहार आता है मुस्लिम समुदायों के लिए। इस दिन अल्लाह को खुश करने और उनकी कृपा पाने के लिए मुसलमान बकरे की कुर्बानी देते है। जिससे उनका आगे का जीवन सुखद होता है और उनके अनुसार अल्लाह उनके हर बुरे कर्म को माफ कर देते है।

लेकिन फिर भी आपको बताते है कि आखिर आज के ही दिन बकरे की बली क्यों दी जाती है? और इसके पीछे क्या रहस्य छुपा हुआ है?

इस्लामिक मान्याताओं के अनुसार एक पैंगबर थे जिनका नाम हजरत इब्राहिम था। और ऐसा माना जाता है कि इनके ही जमाने से बकरीद की शुरूआत हुई। वे हमेशा बुराई के लिए लड़ते थे और अच्छाई का प्रतीत माने जाते थे। उनका पूरा जीवन लोगों की सेवा करने में बीता था।

कहते है कि 90 साल तक की उम्र तक जब उनके कोई भी औलाद नही हुई थी एक दिन उन्होने खुदा से औलाद के लिए इबादत की और फिर अल्लाह की कृपा से उनको एक चांद जैसा बेटा पैदा हुआ। जिसका नाम ईस्माइल था। एक दिन हजरत इब्राहिम के सपने में अल्लाह आए और उन्होने खुदा की राह में कुर्बानी मांगी। इसके बाद हजरत इब्राहिम ने एक ऊंट की कुर्बानी दी। फिर उन्हें सपना आया कि वे अपनी सबसे प्यरी चीज़ की कुर्बानी दें। ईब्राहिम ने अपने सारे प्यारे जानवरों की कुर्बानी दे दी लेकिन बावजूद इसके भी उन्हें सपने आने बन्द नही हुए । सपने में अभी भी उनसे उनकी सबसे प्यारी चीज की कुर्बानी मांगी जा रही थी।

इस बार वे निसंकोच खुदा का कहना मानते हुए अपने बेटे की कुर्बानी देने के लिए तैयार हो गए, जो उनके लिए जी-जान से भी प्यारा था।  उन्होंने अपने पत्नी हाजरा को कहा कि वे बेटे इस्माईल को नहला-धुलाकर तैयार करें। इसके बाद इब्राहिम जब अपने बेटे इस्माईल को लेकर बलि देने की जगह जा रहे थे तभी शैतान ने उन्हें रोकने की बहुत कोशिश की साथ बहकाया कि अपने जिगर के टुकड़े को मारना गलत है। लेकिन इब्राहिम किसी की भी बातों में नही आए और उन्होंने ने आंखों पर पट्टी बांधकर कुर्बानी दे दी। जब इब्राहिम ने अपनी आंख की पट्टी खोली तो देखा कि उनका बेटा उछल-कूद कर खेल रहा था और बलि के स्थान पर उसके बेटे की जगह पर बकरे की बलि दी गई थी। और यह बलि खुदा ने दी थी।

इब्राहि की कुर्बानी से खुदा खुश होकर उनको पैगंबर बना दिया था। तभी से इस दिन बकरे की बलि देते आ रहे है और इस दिन को बकरीद घोषित कर दिया।

बकरीद पर बलि देने की प्रकिया-

बकरीद यानि कि ईद-उल-अजहा के दिन सबसे पहले सभी मुस्लिमो समुदायों द्वारा एक-साथ इक्कटा होकर नमाज अदा की जाती है। इसके बाद बकरे की कुर्बानी दी जाती है। कुर्बानी दिए गये बकरे के गोश्त को तीन हिस्सों में बांटा जाता है। उसके बाद गोश्त का पहला हिस्सा गरीबों में बांट दिया जाता है, दूसरा दोस्तों में बांटा जाता है। और तीसरा हिस्स घर-परिवार के लिए उपयोग किया जाता है।