भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंग!

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By: Sonu Sharma

भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंग देश के भिन्न - भिन्न भागो में स्थित है, माना जाता है की इन ज्योतिर्लिंगों के दर्शन मात्र से ही व्यक्ति के जन्म-जन्म के कष्ट दूर होजाते हैं। इन बारह ज्योतिर्लिंग को द्वादश ज्योतिर्लिंग भी कहा जाता है । जानते है इन ज्योतिर्लिंगों का महत्व व महिमा –

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग - यह संसार का प्रथम ज्योतिर्लिंग माना जाता है, यह गुजरात के सौराष्ट्र में स्थित है। मान्यता है कि चन्द्र देव ने स्वयं इस शिवलिंग कीस्थापना की थी।

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लि आंध्र प्रदेश में श्रीशैल पर्वत पर स्थित है, लोगो का मानना है कि इस पर्वत पर भगवान शिव कि पूजा, अर्चना करने से अश्वमेध यज्ञ केसमान पुण्य प्राप्त होता है और सभी पापों का विनाश होता है ।

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के उज्जैन क्षेत्र में स्थित है, यह एकमात्र ऐसा ज्योतिर्लिंग है जो दक्षिणमुखी है और जहां की भस्मारती विश्व में प्रसिद्ध है।

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के इंदौर क्षेत्र में है, यहाँ की विशेषता यह है कि यह ज्योतिर्लिंग ॐ के आकार में है ।

केदारनाथ ज्योतिर्लिंग उत्तराखंड में स्थित है और ये बद्रीनाथ मंदिर के रास्ते में स्थित है ।

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग पूणे में स्थित है, कहा जाता है कि जो भी कोई इस मंदिर के दर्शन रोजाना सूर्य निकलने के पूर्व करता है उसके लिए स्वर्ग के दरवाजे खुल जाते हैं।

विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग उत्तर प्रदेश के काशी क्षेत्र में स्थित है, भक्तो का मानना है कि यह स्थान भगवान शिव को बहुत प्रिय है और प्रलय आने पर भी यह स्थानज्यो का त्यों रहेगा ।

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग नासिक में स्थित है, इस ज्योतिर्लिंग के सन्दर्भ में कहा जाता है कि गौतम ऋषि और गोदावरी नदी के कहने पर भगवान शिव को इस स्थान पर ज्योतिर्लिंग रूप में रहना पड़ा।

श्री वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग वैद्यनाथ धाम पर स्थित है, यह बिहार के दुमका नामक जनपद में पड़ता है।

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग द्वारिका में स्थित है, इस मंदिर की महिमा ऐसी है की यहाँ जो श्रद्धा से दर्शन करता है उसकी मनोकामनाएं अवशय पूरी हो जाती हैं।

रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग तमिलनाडु में रामनाथ क्षेत्र में आता है, इस मंदिर के विषय में कहा जाता है कि यह भगवान राम द्वारा स्थापित किया गया है ।

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र में स्थित है और यह भगवान शिव का अंतिम ज्योतिर्लिंग है