क्यों जैन, ब्राह्मण तथा अन्य बहुत से समुदाय के लोग लहसुन नहीं खाते ?

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By: Sonu Sharma

भारत के लोग सदियों से लहसुन के स्वास्थ्य सम्बन्धी गुणों से परिचित हैं, इसका प्रयोग केवल खाने में ही नहीं किया जाता बल्कि इसके और भी कई औषधीय उपयोग है । ये अंग्रेजी दवा को भी मात देती है और हाई बीपी को नियंत्रित करने में, गठिया के दर्द को कम करने में, प्रतिरक्षा प्रणाली बढ़ाने में, सर्दी और खासी का इलाज करने में, दाँत दर्द से राहत दिलाने आदि समस्याओं के इलाज में काफी प्रभावशाली है । यह किसी भी तरह के साइड-इफेक्ट से रहित है लेकिन फिर भी बहुत से धर्मो में लहसुन खाना वजिर्त माना गया है। बहुत से लोगों का मानना है की लहसुन न खाने क पीछे धार्मिक कारण है और वही दूसरी ओर कुछ लोग मानते है की इसके पीछे वैज्ञानिक कारण है । जानते है ऐसा क्या कारण है कि जो ब्राम्हण, जैन व अन्य धर्मो के लोग इसका सेवन नहीं करते ।

आयुर्वेद के हिसाब से भोजन तीन प्रकार का होता है; सात्विक, राजसिक व तामसिक । सात्विक भोजन ग्रहण करने से मन शांत होता है, राजसिक भोजन ग्रहण करने से जोश में वृद्धि होती है तथा तामसिक भोजन ग्रहण करने से व्यक्ति वासना की ओर आकर्षित होता है । लहसुन तामसिक भोजन की श्रेणी में आता है इसलिए भी बहुत से लोग इसका सेवन नहीं करते।

जैन धर्म को मानने वाले लोग जमीन के नीचे उगाई हुई सब्जी या फल नहीं खाते, जमीन के नीचे उगने वाली सब्जी में बहुत से सूक्ष्म जीव होते है जिनकी हत्या हो जाती है ओर जैन धर्म हिंसा के विरुद्ध हैइसलिए इस धर्म में लहसुन का सेवन करना मना है । ब्राह्मण और दुसरे धर्म के लोग मानते है की लहसुन के सेवन से व्यक्ति में क्रोध, चिड़चिड़ेपन की भावना बढ़ जाती है इसीलिए वे लहसुन नहीं खाते ।