क्या होती है शनि की साढ़े साती?

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लेखक: सोनू शर्मा

क्या होती है शनि की साढ़े साती?

कुंडली में जिस राशि में चंद्र स्थित हो उससे बारहवे भाव में शनि गमन करता है तो इसे शनि की साढ़े साती कहा जाता है । शनि प्रत्येक राशि में ढ़ाई वर्ष गमन करता है, चन्द्रमा से ग्यारवे तथा चंद्र में पहले में भी जब गमन करता है तब दोनों भावों के गमन को मिलाकर पाँच साल होते है तथा बारवे भाव के ढ़ाई वर्ष मिलाकर साढ़े सात वर्ष होते है, इसी को साढ़े साती कहा जाता है ।

शनि की साढ़े साती को ज़्यादातर लोग अशुभ मानते है लेकिन शनि को अशुभ न कहकर कठोर कहना उचित होगा क्यों की शनि न्याय का देवता है । वह व्यक्ति को उसके कर्मो के अनुसार इसी जीवन में आने वाली समस्याओं से, संकटो व दुर्घटनाओं का आभास कराता है ।

शनि व्यक्ति को इसी जीवन में उसके कर्मो के हिसाब से शुभ और अशुभ फल देता है, शनि का प्रभाव उन पर बुरा पड़ता है जिन्होंने अपने जीवन में बुरे कर्म किये हो और शनि उन्हें अच्छा फल देता है जिनके कर्म अच्छे हो। जिस व्यक्ति की कुंडली में जन्म से ही शनि की साढ़े चल रही हो उन्हें अपने जीवन में बहुत सी मुसीबतों का सामना करना पड़ता है ।

जब किसी व्यक्ति की साढेसाती चल रही हो तब उसे कोई भी शुभ काम नहीं करना चाहिए अन्यथा उसे उसका अच्छा फल नहीं मिलता जैसे की कोई नया बिज़नेस शुरू नहीं करना चाहिए, कोई नया वाहन नहीं खरीदना चाहिए।

साढ़ेसाती के तीन चरण होते है; साढ़ेसाती के पहले चरण में जातक और उसके परिजन प्रभावित होते है, दुसरे चरण के व्यक्ति का व्यापर या व्यवसाय प्रभावित होता और तीसरे चरण में जातक की संतान, परिवार और उसका स्वास्थ प्रभावित होते है ।